कैसे हो तुम दिल हमारे करते नहीं कुछ काम, दिमाग की क्यों सुनते नहीं कर भी लो कुछ काम। बोल बोल कर थक गया भेजा समझाये तुम्हें अब कैसे, छोडी तरफदारी तेरी, तुम तो हो कामचोर साले... केहता है दिमाग आयीं है परीक्षा की घड़ी, लेकिन तुम्हें कीस बात की है पडी, अपनीही धुन में तुम गाते हो, गीत वो बेफिक्री के दिमाग को सुनाते हो, शरीर भी तुमसे झगड़ने लगा था, तुम्हारी बेपरवाहीयां देख वो भी रो पड़ा था। तुरंत दिमागने आदेश दिया... पेश करो दिल को मेरे आगे वो नादान आया अपनीही मस्तीमें, दिमाग बोला तुम्हें हम काबू में रखेंगे, जंजीरों में जकड़ लेंगे... दिल बोला :-जनाब आप करलो चाहे सितम हजार, खत्म ना होगा ये कामचोर मिजाझ, बांधना हो गर मुठ्ठी में मुझे तो मेहकाओ खुशी के पल चार, तब कर जाऊंगा हर काम।