कैसे हो तुम दिल हमारे करते नहीं कुछ काम, दिमाग की क्यों सुनते नहीं कर भी लो कुछ काम। बोल बोल कर थक गया भेजा समझाये तुम्हें अब कैसे, छोडी तरफदारी तेरी, तुम तो हो कामचोर साले... केहता है दिमाग आयीं है परीक्षा की घड़ी, लेकिन तुम्हें कीस बात की है पडी, अपनीही धुन में तुम गाते हो, गीत वो बेफिक्री के दिमाग को सुनाते हो, शरीर भी तुमसे झगड़ने लगा था, तुम्हारी बेपरवाहीयां देख वो भी रो पड़ा था। तुरंत दिमागने आदेश दिया... पेश करो दिल को मेरे आगे वो नादान आया अपनीही मस्तीमें, दिमाग बोला तुम्हें हम काबू में रखेंगे, जंजीरों में जकड़ लेंगे... दिल बोला :-जनाब आप करलो चाहे सितम हजार, खत्म ना होगा ये कामचोर मिजाझ, बांधना हो गर मुठ्ठी में मुझे तो मेहकाओ खुशी के पल चार, तब कर जाऊंगा हर काम।
Thursday, February 8, 2018
Tuesday, December 5, 2017
प्यारे दुश्मन।
खुदगर्जी के पाठ कोई तो सीखांदो रकीबों, हमने तो हमेशा ही अपने हाथ खोल कर रखे हैं। यकीन मानिए आपकी कसम, हर बार आपका गुरुर तोडने की चाहत...
हम दिल में दबाये हुए हैं।
हम दिल में दबाये हुए हैं।
वेद 🍁
Thursday, November 9, 2017
अंदाज-ए-ईश्क
केहेना था जो केह दिया अब कोई खलिश नहीं दील में बाकी, मन को ठेस पहुंचाना , गम में डुब जाना, ये चीजें मेरे फितरत में नहीं आती।
खूबसूरती की कदर करना अच्छेसे आता है हमे, औरोंके फैसलों की इज्जत करना खुब आता है हमे, बेवजह कीसीपर हक जताना मेरी आदत नहीं, कोई आना चाहे तो आये, इस जिंदगी में कोई रंजीश नहीं. . .
खुबसूरत था वो मौसम, जहां एक छाता दो दिलों को बारीश में सुलगा राहा था, जहां एक कॉफी ☕ दोनों के बीच दोस्ती बढ़ा रही थी, जहां फीजाए वादियों में गीत गुनगुना रही थी, जहां उचाईयोपर लहराता आंचल होश छीन राहा था, जहां हर एक नगमा मन कहे गीत गाए जा रहा था। मैं वहीं जीता , हा मै वहीं जीता ।
वेद 🍁
खूबसूरती की कदर करना अच्छेसे आता है हमे, औरोंके फैसलों की इज्जत करना खुब आता है हमे, बेवजह कीसीपर हक जताना मेरी आदत नहीं, कोई आना चाहे तो आये, इस जिंदगी में कोई रंजीश नहीं. . .
खुबसूरत था वो मौसम, जहां एक छाता दो दिलों को बारीश में सुलगा राहा था, जहां एक कॉफी ☕ दोनों के बीच दोस्ती बढ़ा रही थी, जहां फीजाए वादियों में गीत गुनगुना रही थी, जहां उचाईयोपर लहराता आंचल होश छीन राहा था, जहां हर एक नगमा मन कहे गीत गाए जा रहा था। मैं वहीं जीता , हा मै वहीं जीता ।
वेद 🍁
Friday, November 3, 2017
लफ्ज कुछ दिल से।
फरियाद ना किसीने लिखी है , ना ही तमंचा कसा है किसी पे, फिक्र नहीं है खुद की और ना ही थी रकीबोंकी, रुक्सत किया है फिजाओं में सभी को , ना ही दिदार की तलाश है और कोई तमन्ना इन आँखोंकी...
वेद 🍁
वेद 🍁
Friday, October 27, 2017
गुस्ताख बारीश
फीर वो शाम आयी जीसने सोचने पर मजबूर कर दिया,
फीर वो बात हूई जीसने दिमागमे खलबली मचा दी।
मुलाकातों का सिलसिला खत्म हो गया था, न जाने तभी बरसात कैसे हो गयी।
भीगी हुई सड़कों पर वो दौड़ने लगी थी, आज वो बारीश भी कुछ केहेना चाहती थी। कुछ समझ आये तो बात बनेगी, वरना खाली हाथ ये बरखा जाएगी।
बिखरी हुई वो कलीया जुही की, देख जीसे वो गाना- गुनगुनाने लगी। रूख गयी मेरी नजरे उस पर,
और कमबख्त ये बारीश मुझे भीगाने लगी थी।
वेद 🍁
फीर वो बात हूई जीसने दिमागमे खलबली मचा दी।
मुलाकातों का सिलसिला खत्म हो गया था, न जाने तभी बरसात कैसे हो गयी।
भीगी हुई सड़कों पर वो दौड़ने लगी थी, आज वो बारीश भी कुछ केहेना चाहती थी। कुछ समझ आये तो बात बनेगी, वरना खाली हाथ ये बरखा जाएगी।
बिखरी हुई वो कलीया जुही की, देख जीसे वो गाना- गुनगुनाने लगी। रूख गयी मेरी नजरे उस पर,
और कमबख्त ये बारीश मुझे भीगाने लगी थी।
वेद 🍁
एक कदम हुस्न की और...
शाम भी नशेमे झुम उठी, मदहोश हो गया था वो मौसम,
फना हुए थे कई चेहरे, तो थम रही थी कही धड़कनें ।
जिक्र उसका कुछ इस कदर हुआ, मुस्कुराहट थी होठोंपे
और आसु थे निगाहोंमे।
साथ उसका, चाह उसकी कहीं खीच रही थीं बनकर डोर अनदेखी। राह में खड़े होकर सहेज रहे थे उसकेही सपने,
दिल में धडकन थी या उसके नाम की गुंज, जुबां पर लफ्ज़ थे या फिर उसकी तारीफ, खताए कर राहा था
या हो गया था कुछ हासिल, केहर मचा था हर दुसरे रुप से उसके, या छा गये थे खुशी के बादल, बस एक तिरछी नजरसे। फरिश्तोंने हाथोंसे बनायी थी उसकी मुरत, या दील की छन्नी से तराशी गयी थी उसकी सीरत।
फूलों की खुशबूभी फीकी गीरे ऐसी मखमली काया उसकी, वो देखे एक नजर तो पल मे रूख जाये दुनिया मेरी।
फना हुए थे कई चेहरे, तो थम रही थी कही धड़कनें ।
जिक्र उसका कुछ इस कदर हुआ, मुस्कुराहट थी होठोंपे
और आसु थे निगाहोंमे।
साथ उसका, चाह उसकी कहीं खीच रही थीं बनकर डोर अनदेखी। राह में खड़े होकर सहेज रहे थे उसकेही सपने,
दिल में धडकन थी या उसके नाम की गुंज, जुबां पर लफ्ज़ थे या फिर उसकी तारीफ, खताए कर राहा था
या हो गया था कुछ हासिल, केहर मचा था हर दुसरे रुप से उसके, या छा गये थे खुशी के बादल, बस एक तिरछी नजरसे। फरिश्तोंने हाथोंसे बनायी थी उसकी मुरत, या दील की छन्नी से तराशी गयी थी उसकी सीरत।
फूलों की खुशबूभी फीकी गीरे ऐसी मखमली काया उसकी, वो देखे एक नजर तो पल मे रूख जाये दुनिया मेरी।
वेद 🍁
संवाद दो अधुरे दिलोंका...
आज वो मिलने आयी थी, मेरे साथ चलने आयी थी।
बोहोत वक्त लगाया मुझे खोजने में, ये केहकर चीडारही थी।
कैसे ना खोजता मिलने का वादा जो कीया था तुमसे,
उस रोज बरखा के मौसम में ठीक तुम्हारे घर के सामने हाथोंमे जुही की कलियाँ लिए बैठा था, तुम्हें वो बेहद पसंद थी। उनकी मेहेक तुम तक पहुंची और तुम कीसी की परवाह किए बगैर दौडी चली आयी।
सब याद है मुझे कुछ भुली नहीं हु,
मैने दौड़कर तुम्हें सीनेसे लगाया था।
अगले ही पल में मैंने खुद को तुमसे अलग कर दिया था।
मुझसे फिर कभी ना मीलना ये केहने तुम्हारे करीब आयी थी। लेकिन देख तुम्हें सामने सब कुछ भुल गयी थी।
आज फीर वो शाम आयी है फीर बादल छाए हैं, बारीश फीरसे अपने गीत गुनगुना रही हैं। उस दिन भी मेरे साथ तुम थी, आज भी हो...
सिर्फ उस समय एक छाता था, आज दोनो भीगे हुए हैं।
वो चाय की गर्म प्याली, वो सर्दी भरा मौसम, वो बारीश और तेरा हाथों को छूकर चलना क्या याद है तुम्हें...
सुनो प्यार में तुम अकेले नहीं थे मै भी नशेमे झुम उठी थी
हर वो चीज जो तुम महसुस कर रहे थे, उन्हें मै भी आजमा रही थी।
फर्क बस इतना है कि मैं आगे बढी और तुम ख्यालोंमे कही खो गये।
बातो में उलझाना कोई तुमसे सीखे,
हा और पत्थर दिल बनना कोई तुमसे सीखे।
वेद 🍁
बोहोत वक्त लगाया मुझे खोजने में, ये केहकर चीडारही थी।
कैसे ना खोजता मिलने का वादा जो कीया था तुमसे,
उस रोज बरखा के मौसम में ठीक तुम्हारे घर के सामने हाथोंमे जुही की कलियाँ लिए बैठा था, तुम्हें वो बेहद पसंद थी। उनकी मेहेक तुम तक पहुंची और तुम कीसी की परवाह किए बगैर दौडी चली आयी।
सब याद है मुझे कुछ भुली नहीं हु,
मैने दौड़कर तुम्हें सीनेसे लगाया था।
अगले ही पल में मैंने खुद को तुमसे अलग कर दिया था।
मुझसे फिर कभी ना मीलना ये केहने तुम्हारे करीब आयी थी। लेकिन देख तुम्हें सामने सब कुछ भुल गयी थी।
आज फीर वो शाम आयी है फीर बादल छाए हैं, बारीश फीरसे अपने गीत गुनगुना रही हैं। उस दिन भी मेरे साथ तुम थी, आज भी हो...
सिर्फ उस समय एक छाता था, आज दोनो भीगे हुए हैं।
वो चाय की गर्म प्याली, वो सर्दी भरा मौसम, वो बारीश और तेरा हाथों को छूकर चलना क्या याद है तुम्हें...
सुनो प्यार में तुम अकेले नहीं थे मै भी नशेमे झुम उठी थी
हर वो चीज जो तुम महसुस कर रहे थे, उन्हें मै भी आजमा रही थी।
फर्क बस इतना है कि मैं आगे बढी और तुम ख्यालोंमे कही खो गये।
बातो में उलझाना कोई तुमसे सीखे,
हा और पत्थर दिल बनना कोई तुमसे सीखे।
वेद 🍁
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